Thursday, 26 February 2015

व्यर्थ ही परेशान हुए न | मैनें कहा था न कि वह तुम्हारी है | अरे भाई औरत कविता से ज्यादा गूढ़ होती है,उसे समझना नामुमकिन है | मैंने जिंदगी में औरत के ऐसे ऐसे रंग देखे हैं कि औरत के प्रति मेरी सारी जिज्ञासा शांत हो चली है |
तमाम मर्दों से सम्बन्ध रखने के बाद भी औरत अपने सीता-सावित्री रूप को बनाये रखना चाहती हैं | औरत के सीता-सावित्री रूप को बनाये रक्खो-उस पर कोई सवाल मत करो |
स्वप्न मत दिखाओ मेरे दोस्त
सपनों से डर लगता है |
वह शातिर खिलाड़ी है तुम्हारे भीतर के पुरुष को भड़का रही है |
मुझे खुद नहीं मालूम कहाँ हूँ
यहां हूँ या वहां हूँ
साहित्य में तो अब यहीं बाकी है
जिसके पास पैसा है उसी के पास साकी है |
आम का सारा रस चूस लिया
फिर उसे फेंक दिया, क्या गुनाह किया
हर औरत  एक अच्छी बिज़नेस वूमेन हैं और सोने पे सुहागा यह कि उसके पास वह चीज़ है जिसका हर पुरुष शौक़ीन है और यह बात वह अच्छी तरह जानती है |
प्रेम के भ्रम में मत पड़ो
अपना काम करो और आगे बढ़ो
अवधूत हो तुम यार।
तुम मेरा बुढ़ापा खराब करके ही मानोगे
दो चार मोर-पंख मेरे मुकुट में भी टाँकोगे
संबधों को आलोचक की दृष्टि से मत देखो गीतकार की दृष्टि से देखो |
प्रेम में
खाली जगहों को
अपने मन मुताबिक़ भरना
होगा तुम्हें सीखना
वह तुम पर भड़की
इसे ऐसा समझो कि
वह तुम्हारे साथ सोने के लिए तड़पी
वह रूठे और कोई उसे मनाये
औरत की यह आदिम ख्वाइश है होती |
जब कोई औरत
किसी के लिए अतिरिक्त प्रेम दिखाए
तो समझना कि वह उस व्यक्ति से दूर जा रही है
उसका तुम पर भड़कना
यह साबित करता है कि वह तुम्हारे करीब आ रही है |
रिश्तों की
ह्त्या करना चाहते हैं ?
तो पहले उन्हें परिभाषित करिये
और उन्हें मर्यादा में बांधिए
फिर हाथ में कटोरा लेकर भीख मांगिये
आकाश में उड़ते हुए पंछी को पिजड़े में डालिये
फिर उसकी मौत पर मातम मनाइये 

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