Saturday, 28 November 2015

बेबुनियाद है आपका डर, देश की आम जनता किसी भी मुसलमान को शक की निगाह से नहीं देखती | असहिष्णुता का मुद्दा चंद सिरफिरे और उनके चाकर बुद्धिजीवियों द्वारा अपने राजनीतिक स्वार्थों को साधने के लिए उछाला जाता है | आज भी बाल मैं सुलेमान से ही कटवाता हूँ और एक भी हिन्दू मुझे नहीं मिला जिसने इस तथाकथित असहिष्णुता के माहौल में सुलेमान से बाल कटवाना बंद कर दिया हो | मटन आज भी जुबैर के यहाँ से ही आता है और उसके भी गाहकों की संख्या में ( इस भीषण असहिष्णुता के माहौल में ) कोई कमी नहीं आयी है | टीवी देखना बंद कर दीजिये आपको भाईचारा के अतिरिक्त कुछ भी नहीं दिखेगा |

2) आज़ादी के बाद हर घर में गांधी,नेहरू ,सुभाष तथा भगत सिंह की तसवीरें दीवार की शोभा बढ़ाती थी |कांग्रेसी शासन के दौरान सुभाष चन्द्र बोस तथा भगत सिंह की तसवीरें गायब हो गयीं | समझ में नहीं आता है कि यह सब कांग्रेस द्वारा योजनाबद्ध तरीके से किया गया या वास्तव में इन क्रांतिकारियों का देश की आज़ादी में कोई योगदान ही नहीं था |

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