एक दुसरे पर
तोहमत लगाना
एक दूसरे को
नीचा दिखाना
क्या यही साहित्य है ?
हो सकता है इसे पत्रकारिता कहते हों
मैं न साहित्यकार हूँ ना पत्रकार
लेकिन यह बेहूदगी
मुझे नहीं है स्वीकार ?
तोहमत लगाना
एक दूसरे को
नीचा दिखाना
क्या यही साहित्य है ?
हो सकता है इसे पत्रकारिता कहते हों
मैं न साहित्यकार हूँ ना पत्रकार
लेकिन यह बेहूदगी
मुझे नहीं है स्वीकार ?
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