Friday, 2 August 2013

साँप खून पीता है

साँप खून पीता है
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कोई याद करता है
तो अब हिचकियाँ नहीं आती |
सपेरे साँप लेकर
अब घर के दरवाजे पर नहीं आते
साँप को दूध पिलाया था कब
मुझे याद नहीं है अब
साँप बड़े बड़े महलों में रहने लगा है
दूध की जगह
अब वह खून पीने लगा है
सपेरे साँप के महलों में
दरबानी कर रहे हैं
साँप बीन बजाता है
और अब सपेरा साँप से डरता है |    
मुंडेर पर बोलता है कागा
तो अब आते नहीं मेहमान |
पशु,पक्षी और आदमी
सब के सब हो गए बेईमान |

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