पलटकर देखो
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एक बुजुर्ग
मेरे कंधे पर हाथ रखकर
बहुत प्यार से बोले
तुम्हारा बेटा
बिलकुल तुम जैसा दिखता है
शक्ल और सूरत में ही नहीं
सोच में भी
और जो बिछाए थे तुमने रास्ते
उन्ही पर
बिलकुल तुम जैसा ही चलता है
पहली बार मैंने बेटे को
बहुत ध्यान से देखा
और शर्म से गड़ गया यह सोचकर कि
बेटे की उम्र में जब मैं था
तो कितना बेहूदा दिखता था |
और किस तरह फूलों को
रौंद कर चलता था
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एक बुजुर्ग
मेरे कंधे पर हाथ रखकर
बहुत प्यार से बोले
तुम्हारा बेटा
बिलकुल तुम जैसा दिखता है
शक्ल और सूरत में ही नहीं
सोच में भी
और जो बिछाए थे तुमने रास्ते
उन्ही पर
बिलकुल तुम जैसा ही चलता है
पहली बार मैंने बेटे को
बहुत ध्यान से देखा
और शर्म से गड़ गया यह सोचकर कि
बेटे की उम्र में जब मैं था
तो कितना बेहूदा दिखता था |
और किस तरह फूलों को
रौंद कर चलता था
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