अलग दिखने की ख्वाइश में
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हाथों और पैरों में
जंजीरें पड़ी हों
कैदी सा जीवन हो
यह जीवन भी कोई जीवन है ?
बंदिशें उन्हें बाध्य करती हैं
और वे बागी हो जातें हैं
बंदिशें न हो पिंजरा खुला हो
तो आकाश में उड़ने का सलीका
उन्हें खुद- ब- खुद आ जाएगा |
पशुओं से अलग दिखने के चक्कर में
हम उनसे बत्तर नहीं हो गयें हैं ?
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हाथों और पैरों में
जंजीरें पड़ी हों
कैदी सा जीवन हो
यह जीवन भी कोई जीवन है ?
बंदिशें उन्हें बाध्य करती हैं
और वे बागी हो जातें हैं
बंदिशें न हो पिंजरा खुला हो
तो आकाश में उड़ने का सलीका
उन्हें खुद- ब- खुद आ जाएगा |
पशुओं से अलग दिखने के चक्कर में
हम उनसे बत्तर नहीं हो गयें हैं ?
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