सेवानिवृति के बाद
पत्नी जी बोलीं-
मैं दिन और रात
तुम्हारी सेवा में लगी रहती हूँ
मैंने उन्हें टोका-
श्रीमती जी रुकिए
ज़रा मेरी भी सुनिए
दिन की बात तो ठीक है
रात की सेवा तो
न जाने कब से निरस्त है |
पत्नी जी बोलीं-
मैं दिन और रात
तुम्हारी सेवा में लगी रहती हूँ
मैंने उन्हें टोका-
श्रीमती जी रुकिए
ज़रा मेरी भी सुनिए
दिन की बात तो ठीक है
रात की सेवा तो
न जाने कब से निरस्त है |
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