कहते हैं कि जो कविता लोगों को समझ में न आये और समीक्षक उसमें नए नए अर्थ खोज पाएं वही कविता महान होती है वैसी ही एक रचना जो मुझे भी समझ में नहीं आई,आपके लिए प्रस्तुत | कविता के समीक्षकों से प्रार्थना कि आईये ,गोता लगाइये और समुद्र से कुछ मोती मेरे लिए भी चुन लाईये
समुद्र की विशाल छाती पर
पहाड़ का एक टुकड़ा
सुना रहा था अपना दुखड़ा
पानी को फुरसत नहीं हैं
दौड़ना है उसे
लहरों के साथ
किनारों को छूना और लौट आना
लहरों का अस्तित्व
ख़त्म होने तक
उनके साथ रहना और दौड़ना |
समुद्र क्या है ?
पानी ,लहरें ,गहराई
मछलियां ,रत्नों का भण्डार और तरूणाई
छाती पर पहाड़ का एक टुकड़ा
समुद्र को सुना भी सकेगा अपना दुखड़ा |
समुद्र की विशाल छाती पर
पहाड़ का एक टुकड़ा
सुना रहा था अपना दुखड़ा
पानी को फुरसत नहीं हैं
दौड़ना है उसे
लहरों के साथ
किनारों को छूना और लौट आना
लहरों का अस्तित्व
ख़त्म होने तक
उनके साथ रहना और दौड़ना |
समुद्र क्या है ?
पानी ,लहरें ,गहराई
मछलियां ,रत्नों का भण्डार और तरूणाई
छाती पर पहाड़ का एक टुकड़ा
समुद्र को सुना भी सकेगा अपना दुखड़ा |
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