Thursday, 1 August 2013

चढ़ाओ मत उढ़ाओ चादर
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मंदिर मस्जिद
और सूफियों की मजार पर
जो चादर
हम चढ़ाते हैं
वे फिर से बिकने के लिए
उसी दुकानपर चले आते हैं |
जितनी बार
वह चादर बिकती है
जिंदगी में
उससे कहीं ज्यादा बार
हम बिकते हैं |
मंदिर ,मस्जिद और मजारों पर
चादर चढ़ाने का यह सिलसिला
नहीं रूकेगा
और आदमी
मंदिर ,मस्जिद और मजारों के बाहर
भूख और ठण्ड से मरता रहेगा

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