वह औरत जो पुरुष की पूजा करती है उस औरत को मृत्यदंड दिए बगैर स्त्री की मुक्ति संभव नहीं है |पुरुष का यह विश्वास कि औरत उसके लिए जीती है जब तक नहीं टूटेगा पुरुष की नींद टूटेगी नहीं |पुरुष के अहंकार को पुष्ट करने का सारा श्रेय औरत को ही जाता है ,पता नहीं औरत कभी जागेगी भी या नहीं या योहीं करवा चौथ एवं छठ पूजा के बहाने पुरुष के अहंकार को पुष्ट करती रहेगी और पुरुष मदमस्त हाथी की तरह अपने पैरों तले स्त्री को यों ही रौंदता रहेगा | .
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