दोस्त की तरह
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हम एक दुसरे को
पीठ पीछे देते रहे गाली
हम जब मिले
दोस्तों की तरह गले मिले |
हर बार यही होता है मंजर
दोस्त की तरह मिलते हैं
और हाथ में होता है खंजर |
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हम एक दुसरे को
पीठ पीछे देते रहे गाली
हम जब मिले
दोस्तों की तरह गले मिले |
हर बार यही होता है मंजर
दोस्त की तरह मिलते हैं
और हाथ में होता है खंजर |
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