दामिनी का बलात्कार 16/12/2012
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ओ नपुंसक
तुम्हारी इस हरकत पर
भेड़िये भी शर्मिंदा
क्या हम हैं मानुष जिन्दा
हरबार
संसद से सड़क तक
यह आक्रोश
अगले बलात्कार तक
चुक जाता है हरबार |
बलात्कारी
इस सच को
अच्छी तरह जानता है
मंद मंद मुस्कराता है |
अब आगे से
बलात्कारी की सिर्फ एक सजा
उसका लिंग काटकर
उसके हाथ में
अगला बलात्कार करने
की सामर्थ छीन कर |
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ओ नपुंसक
तुम्हारी इस हरकत पर
भेड़िये भी शर्मिंदा
क्या हम हैं मानुष जिन्दा
हरबार
संसद से सड़क तक
यह आक्रोश
अगले बलात्कार तक
चुक जाता है हरबार |
बलात्कारी
इस सच को
अच्छी तरह जानता है
मंद मंद मुस्कराता है |
अब आगे से
बलात्कारी की सिर्फ एक सजा
उसका लिंग काटकर
उसके हाथ में
अगला बलात्कार करने
की सामर्थ छीन कर |
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