कल रात मैं जागता रहा ,देखता रहा सपना==
१) इस भयंकर जाड़े में चिता पर ,गुनगुनी धूप का अहसास,पिघलता हुआ शरीर | शनै शनै खोता हुआ अस्तित्व |
२) रात भर अहंकार चिता के पास खड़ा मुस्कराता रहा,थोड़ा भी कम नहीं हुआ उसका कद |
३)शमशान की ख़ामोशी में उन्मुक्त हास्य भी रुदन मालूम पड़ता है , चिता की रोशनी में हर आदमी सन्यासी दिखाई पड़ता है |
१) इस भयंकर जाड़े में चिता पर ,गुनगुनी धूप का अहसास,पिघलता हुआ शरीर | शनै शनै खोता हुआ अस्तित्व |
२) रात भर अहंकार चिता के पास खड़ा मुस्कराता रहा,थोड़ा भी कम नहीं हुआ उसका कद |
३)शमशान की ख़ामोशी में उन्मुक्त हास्य भी रुदन मालूम पड़ता है , चिता की रोशनी में हर आदमी सन्यासी दिखाई पड़ता है |
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