मेरे पास बैठीं
मेरी हथेलियों पर
चन्दन मलती रहीं
चलते वक्त
उसी हथेली पर
तुमने
अंगारा रख दिया
हथेली पर
उग आया "तीर्थ "
प्रेम का "सीद्पीठ"
मेरी हथेलियों पर
चन्दन मलती रहीं
चलते वक्त
उसी हथेली पर
तुमने
अंगारा रख दिया
हथेली पर
उग आया "तीर्थ "
प्रेम का "सीद्पीठ"
No comments:
Post a Comment