इस देश में
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साधू या शैतान
किसी भी भेष में |
रहना है इसी देश में
इस देश में
इंसानों की
इन दोनों प्रजातियों को
बेख़ौफ़ आजादी है मिली |
साधू जो चाहे बोले
शैतान
जिसका चाहे नाड़ा खोले
साधू चाहते हैं अन्धानुकरण
कोई कुछ न बोले
शैतान चाहते हैं
अन्याय के खिलाफ
कोई अपना मुहँ न खोले
प्रगति और विकास के
इस दौर में
शैतान ने अपना मुखौटा
बदल लिया है
साधू और शैतान
अपने अपने काम में
मुस्तैदी से लगे हैं
और हम
हाथ और मुहँ बांधें खड़े हैं
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साधू या शैतान
किसी भी भेष में |
रहना है इसी देश में
इस देश में
इंसानों की
इन दोनों प्रजातियों को
बेख़ौफ़ आजादी है मिली |
साधू जो चाहे बोले
शैतान
जिसका चाहे नाड़ा खोले
साधू चाहते हैं अन्धानुकरण
कोई कुछ न बोले
शैतान चाहते हैं
अन्याय के खिलाफ
कोई अपना मुहँ न खोले
प्रगति और विकास के
इस दौर में
शैतान ने अपना मुखौटा
बदल लिया है
साधू और शैतान
अपने अपने काम में
मुस्तैदी से लगे हैं
और हम
हाथ और मुहँ बांधें खड़े हैं
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