Friday, 12 May 2017

The dream of common civil code may come true .
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हमें मुसलामानों के बहुविवाह प्रथा से आपत्ति नहीं है,हम केवल यह चाहते है कि यह सुविधा हमें भी प्रदान की जाए | हिन्दू धर्म में भी पुरुषों के लिए बहुविवाह का कोई निषेध नहीं किया गया है | आखिरकार हम एक ही देश के नागरिक हैं फिर हमारे साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों ?

 हिन्दू तो आप भी हैं,जहाँ तक मेरी जानकारी है आप ने अभी तक धर्म परिवर्तन नहीं किया है ? भाई मैंने किसी धर्म की कुरीतियों को उजागर करने की कोशिश नहीं की है बल्कि उनके धर्मानुसार जो अच्छी बातें जैसे बहुविवाह और तीन तलाक़ की मांग की है ताकि देश में एक Common Civil Code बन सके |

 हिन्दू तो आप भी हैं,जहाँ तक मेरी जानकारी है आप ने अभी तक धर्म परिवर्तन नहीं किया है ? भाई मैंने किसी धर्म की कुरीतियों को उजागर करने की कोशिश नहीं की है बल्कि उनके धर्मानुसार जो अच्छी बातें जैसे बहुविवाह और तीन तलाक़ की मांग की है ताकि देश में एक Common Civil Code बन सके |

हज़ारों वर्षों से पुरुष के बहुविवाह और तीन तलाक़ को मुस्लिम स्त्रियां झेल रहीं हैं न | मुस्लिम समाज अगर इसे धर्मानुसार मानता है और हिन्दू धर्म में इसका कोई निषेध भी नहीं है तो यह सुविधा अगर हमें भी मिल जाती है तो देश में एक Common Civil Code बनने की संभावना तो बन सकेगी |

औरत हिन्दू हो या मुस्लिम कमोबेश सभी की हालत दयनीय है | हिन्दू पुरुष तो कानून से बंधा है अगर तीन तलाक़ की सुविधा हिन्दू पुरुष को भी होती तो हिन्दू औरतों की दुर्दशा पर कोई रोनेवाला भी नहीं होता | मुस्लिम औरतों की स्थिति में केवल कानून बनाकर ही कुछ बदलाव किया जा सकता है |

ट्रिपल तलाक़ और हलाला जैसी अमानवीय प्रथाओं पर जो मौन हैं, आखिर वे कौन हैं ?

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