एक अनजाना सा भय ही ती है जो हमें ईश्वर की इबादत के लिए मजबूर करता है, वर्ना किसने देखा है उसे ?
2)
2)
जो आप कहें वही सही बाकी सब बतकही,
अभिव्यक्ति की आज़ादी के पुरोधाओं को नमन |
3)
बूढ़ा हो गया प्रेम
अब कैसी कुशल क्षेम |
अब कैसी कुशल क्षेम |
4)
न एकमुश्त जिंदगी जीते हैं
न एकमुश्त मरते हैं हम लोग
मरने से पहले
थोड़ा थोड़ा मरते हैं हर रोज |
न एकमुश्त मरते हैं हम लोग
मरने से पहले
थोड़ा थोड़ा मरते हैं हर रोज |
5)
हमारी किशोरावस्था में
Jai Narain Budhwar के सभी दोस्तों के बीच
एक मीठे पानी की नदी बहती थी
गुड्डू का न रहना दरअसल उस नदी का सूख जाना है |
Jai Narain Budhwar के सभी दोस्तों के बीच
एक मीठे पानी की नदी बहती थी
गुड्डू का न रहना दरअसल उस नदी का सूख जाना है |
6)
व्यक्ति के बदलने से बदलता है समाज,
समाज को बदलने की बेचैनी में हम खुद को बदलना भूल जाते हैं |
समाज को बदलने की बेचैनी में हम खुद को बदलना भूल जाते हैं |
7)
सवाल करना बहुत अच्छी बात है लेकिन आपके सवाल पर अगर कोई सवाल करता है तो आप बुरा मान जाते हो और सवाल करने वाले को भक्त कहकर भाग लेते हो | किसी भी बहस में प्रश्न और प्रति प्रश्न न हों तो उसे सार्थक बहस नहीं कहा जा सकता है | आपका यह सोचना की जो हम कहें वही सही बाकी सब बतकही की वजह से ही आपकी सोच मात्र जेएनयू में क़ैद होकर रह गयी है |
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