Friday, 12 May 2017

1)

मंटो ने कबीर की परम्परा को आगे बढ़ाया-मंटो-कबीर को नमन |
2)


भीतर हो
या हो बाहर
सन्नाटा चीर दे
कोई शोर ऐसा हो भी तो,
चुरा ले नींद
सपनों को भी चुरा ले
कोई चोर ऐसा हो भी तो,
नृत्य ऐसा करे
बादलों को बुला ले
कोई मोर ऐसा हो भी तो |
3)
सारी जिंदगी हम दोनों के बीच पसरी रही चुप्पी,
लाख कोशिश करते थे छिपाने की फिर भी
घुप अँधेरे में भी दिख ही जाती थी आँखों की नमी |
4)
उम्र जब कम होती है तब अनुभव जनित विश्वासों से सहमत होना सम्भव नहीं हो पाता है |

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