Friday, 12 May 2017

माँ, गैर जरूरी बातों की ओर ध्यान नहीं देती लेकिन अफ़सोस अनुसरण हम हमेशा पिता का करते हैं |

हम भी कभी जवान थे और तब तुम्हारी ही तरह जिंदगी की हक़ीक़त से अनजान थे | हममें और तुममें केवल यही तो फर्क है== मैं जवान था तुम जवान हो |


न मरने का रास्ता 
अगर मुझे मालूम होता 
तो सबसे पहले 
मैं अपना मरना स्थगित करता |

ज्यादातर लोग तो जीना शुरू करने से पहले ही मर जाते है | वैसे मौत भी तो आखिर जिंदगी की शुरुआत ही है |

ख्वाब टूटा है 
लेकिन बचपन नहीं छूटा है |

फेसबुक पर किसी की मौत की खबर पर RIP लिखने की बाढ़ सी आ जाती है, यह सब यंत्रवत होता है==== 
 यह सवेंदना नहीं है, यह शोक भी नहीं है, यह भीड़ में अपनी औपचारिक उपस्थिति दर्ज करने की कवायद मात्र है |

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