सुना है-
अंत में जीत सच की ही होती
लेकिन यह कोई नहीं बताता कि
अंत से पहले ही सच अंतिम सांस लेता है |
कृष्ण का इन्तजार हमारे नपुंसक होने की घोषणा भी तो करता है |
अपनी नपुंसकता को नकारने के लिए हम करते हैं बलात्कार बार-बार
अंत में जीत सच की ही होती
लेकिन यह कोई नहीं बताता कि
अंत से पहले ही सच अंतिम सांस लेता है |
कृष्ण का इन्तजार हमारे नपुंसक होने की घोषणा भी तो करता है |
अपनी नपुंसकता को नकारने के लिए हम करते हैं बलात्कार बार-बार
No comments:
Post a Comment