खोने का डर अगर नहीं होता
तो उग आते इंसानों के भी पर |
2)
तो उग आते इंसानों के भी पर |
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निर्मल वर्मा को उनके जन्मदिन (३ अप्रैल १९२९) पर याद करते हुए---
अंतिम अरण्य के वे दिन
एक चिथड़ा सुख की तलाश में
लाल टीन की छत पर
भटकता रहा 'रात का रिपोर्टर' |
एक चिथड़ा सुख की तलाश में
लाल टीन की छत पर
भटकता रहा 'रात का रिपोर्टर' |
3)
इतिहास माने कब्रिस्तान,
घड़ी-घड़ी इतिहास में चले जाते हो तुम बेईमान |
घड़ी-घड़ी इतिहास में चले जाते हो तुम बेईमान |
4)
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