हमारे देश में सारी प्रतिस्पर्धा खुद को ब्राह्मण या क्षत्रिय साबित करने में ही है |
2)
खिलौने जब डराने लगें
तो समझ लेना
आपके अपने आपसे दूर जानें लगे |
3)
आरक्षण की अफीम चटाकर दलित चेतना को हमेशा के लिए पंगु बना दिया गया है और अब इसके वर्गीय चेतना में परिवर्तित होने की गुंजाइश लगभग समाप्त हो चुकी है |
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खिलौने जब डराने लगें
तो समझ लेना
आपके अपने आपसे दूर जानें लगे |
3)
आरक्षण की अफीम चटाकर दलित चेतना को हमेशा के लिए पंगु बना दिया गया है और अब इसके वर्गीय चेतना में परिवर्तित होने की गुंजाइश लगभग समाप्त हो चुकी है |
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