Saturday, 16 November 2013

मुझे अभी अभी लगा कि
मैं सोता ही रहा
कभी जगा ही नहीं |
उनको पाने के बाद भी
मैं रोता ही रहा
कभी हँसा ही नहीं  |
कौन कह सकता है कि
वह किसी जाल में कभी फंसा ही नहीं ?
जागना-सोना,पाना-खोना
और रोना-हंसना
यही तो जिंदगी है  |
जाल में फंस तो गए हैं
बस अब मुक्त होना है  |

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