Monday, 18 November 2013

वह हर रोज
सुबह सुबह आती है
बारात के साथ
रसोईं में घुस जाती है
और जूठे बरतनों में तलाशती है भोजन
जो रात में
खाया नहीं गया उन पुण्यात्माओं द्वारा
गाय को
जूठन खिलाकर पुण्य कमाने की अभिलाषा
और गाय को माता कहकर
दान कर देने का अहंकार
कन्यादान करने के अहंकार से कमतर नहीं है
हर रोज
जो सुबह सुबह आती है रसोईं में
उसके लिए किसी भी रसोईं में भोजन नहीं है    

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