काश,
हमारे निभाने से निभ जाते रिश्ते
अक्सर
रिश्तों के टूटनें के साथ ही हम टूट जाते हैं
फिर भी रिश्तों को बचा पाना हमारे बस में नहीं होता
उतना आसान भी नहीं है
रिश्तों को निभाना और उन्हें टूटनें से बचाना , है क्या ?
हमारी कोशिश होनी चाहिए कि कविता बची रहे |
हमारे निभाने से निभ जाते रिश्ते
अक्सर
रिश्तों के टूटनें के साथ ही हम टूट जाते हैं
फिर भी रिश्तों को बचा पाना हमारे बस में नहीं होता
उतना आसान भी नहीं है
रिश्तों को निभाना और उन्हें टूटनें से बचाना , है क्या ?
हमारी कोशिश होनी चाहिए कि कविता बची रहे |
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