कौवों की कांव कांव में
मुश्किल हो जाता है, कोयल को सुनना
रंग-भेद ,जाति-भेद और धर्म-भेद का आधार
रंग और पैदाइश क्यों बना ?
कौवों नें जाल कुछ इस तरह बुना कि
सुरीली और नशीली आवाजें हो गयीं धुवाँ
बहुत मुश्किल है
कौवों की इस भीड़ में कोयल को ढूढ़ना
मुश्किल हो जाता है, कोयल को सुनना
रंग-भेद ,जाति-भेद और धर्म-भेद का आधार
रंग और पैदाइश क्यों बना ?
कौवों नें जाल कुछ इस तरह बुना कि
सुरीली और नशीली आवाजें हो गयीं धुवाँ
बहुत मुश्किल है
कौवों की इस भीड़ में कोयल को ढूढ़ना
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