Saturday, 23 November 2013

दुनियाँ की जितनी जनसंख्या है
उतनी ही संख्या है सपनों की
सबके पास उनका अपना एक सपना है
उन सबके सपनों की अपनी एक कहानी है
दुनियाँ का सारा साहित्य
शब्दों से गढ़ी गई इमारत है
जिसमें दफ्न है उनके सपनों की कहानी |
कुछ लोग
आज भी व्यस्त हैं उनके सपनों को जानने में
और कुछ उनके सपनों को चुराने की कोशिश में  |

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