1. भारत में ही सर्वप्रथम वर्णव्यवस्था की शरुआत हुई , जिसने भारत को दो हजार वर्षों तक गुलाम बनाने में मुख्य भूमिका निभायी.
2. भारत में ही सर्वप्रथम सतीप्रथा की शरुआत हुई, जिसमे विधवा औरतों को जिन्दा जला दिया जाता था. इस प्रथा को ईस्ट इंडिया कम्पनी सरकार ने 1841 में कानून बनाकर बंद किया था.
3. भारत में ही सर्वप्रथम धर्म के नाम पर छुआछूत की शरुआत हुई, जिसके द्वारा लाखों लोगों को अछूत बनाकर सभ्यता के प्रकाश से दूर रखा गया.
4. भारत में ही सर्वप्रथम धर्म के नाम पर गाय, बैलों और घोड़ों की बलि देने की प्रथा का आरम्भ हुआ.
5. भारत में ही सर्वप्रथम धर्म के नाम पर नरबलि की प्रथा का आरम्भ किया गया.
6. भारत में ही सर्वप्रथम दासप्रथा का भी आरम्भ हुआ.
7. भारत में ही सर्वप्रथम धर्म के नाम पर निष्ठुर प्रथा गंगा-प्रवाह का आरम्भ हुआ था, जिसमे मनौती पूरी होने पर लोग अपनी पहली संतान को गंगा-सागर में छोड़ देते थे. इस क्रूर प्रथा को कम्पनी सरकार ने 1835 में कानून बनाकर बंद किया था.
8. भारत में ही सर्वप्रथम धर्म के नाम पर चरक-पूजा का आरम्भ हुआ था, जिसमे मोक्ष के इच्छुक उपासक के मेरुदंड में दो लोहे के हुक धंसाकर उसे रस्सी के द्वारा चरखी के एक छोर से लटका देते थे और दूसरे छोर से उसे तब तक नचाते थे, जब तक उसके प्राण नहीं निकल जाते थे. इस प्रथा को ब्रिटिश सरकार ने 1863 में कानून द्वारा बंद किया था.
9. भारत में ही सर्वप्रथम कर्मफल आधारित पुनर्जन्म के सिद्धांत का आरम्भ हुआ, जिसने गरीबों के शोषण का क्रूर तन्त्र विकसित किया.
10. भारत में ही सर्वप्रथम सनातन धर्म के नाम पर एक ऐसे धर्म का आरम्भ हुआ, जिसमे समानता के लिए कोई जगह नहीं है.
उपरोक्त परिप्रेक्ष में क्या हम अपनी विरासत पर गर्व कर सकते हैं ?
2. भारत में ही सर्वप्रथम सतीप्रथा की शरुआत हुई, जिसमे विधवा औरतों को जिन्दा जला दिया जाता था. इस प्रथा को ईस्ट इंडिया कम्पनी सरकार ने 1841 में कानून बनाकर बंद किया था.
3. भारत में ही सर्वप्रथम धर्म के नाम पर छुआछूत की शरुआत हुई, जिसके द्वारा लाखों लोगों को अछूत बनाकर सभ्यता के प्रकाश से दूर रखा गया.
4. भारत में ही सर्वप्रथम धर्म के नाम पर गाय, बैलों और घोड़ों की बलि देने की प्रथा का आरम्भ हुआ.
5. भारत में ही सर्वप्रथम धर्म के नाम पर नरबलि की प्रथा का आरम्भ किया गया.
6. भारत में ही सर्वप्रथम दासप्रथा का भी आरम्भ हुआ.
7. भारत में ही सर्वप्रथम धर्म के नाम पर निष्ठुर प्रथा गंगा-प्रवाह का आरम्भ हुआ था, जिसमे मनौती पूरी होने पर लोग अपनी पहली संतान को गंगा-सागर में छोड़ देते थे. इस क्रूर प्रथा को कम्पनी सरकार ने 1835 में कानून बनाकर बंद किया था.
8. भारत में ही सर्वप्रथम धर्म के नाम पर चरक-पूजा का आरम्भ हुआ था, जिसमे मोक्ष के इच्छुक उपासक के मेरुदंड में दो लोहे के हुक धंसाकर उसे रस्सी के द्वारा चरखी के एक छोर से लटका देते थे और दूसरे छोर से उसे तब तक नचाते थे, जब तक उसके प्राण नहीं निकल जाते थे. इस प्रथा को ब्रिटिश सरकार ने 1863 में कानून द्वारा बंद किया था.
9. भारत में ही सर्वप्रथम कर्मफल आधारित पुनर्जन्म के सिद्धांत का आरम्भ हुआ, जिसने गरीबों के शोषण का क्रूर तन्त्र विकसित किया.
10. भारत में ही सर्वप्रथम सनातन धर्म के नाम पर एक ऐसे धर्म का आरम्भ हुआ, जिसमे समानता के लिए कोई जगह नहीं है.
उपरोक्त परिप्रेक्ष में क्या हम अपनी विरासत पर गर्व कर सकते हैं ?
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