Saturday, 16 November 2013

जब यह सुनिश्चित हो जाता है कि किसी व्यक्ति विशेष की पहचान करने से हमारी पहचान भी बनती है तभी बहुत से लोग उस व्यक्ति विशेष की पहचान करने के लिए आगे आते हैं  | मुक्तिबोध के समकालीनों ने उनकी पहचान करने में कोताही की, आखिर क्यों ? 

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