न तो कोई विचार है
और न मान्यताएं
केवल सन्नाटा है |
सन्नाटा जब चीखता है
दहलाता है ,
भीड़ में
वह डर जाता है
इसीलिए
न वह किसी के पास जाता है
और न कोई उसके पास आता है |
वह पथराया सा खड़ा है
खाली घड़ा है |
और न मान्यताएं
केवल सन्नाटा है |
सन्नाटा जब चीखता है
दहलाता है ,
भीड़ में
वह डर जाता है
इसीलिए
न वह किसी के पास जाता है
और न कोई उसके पास आता है |
वह पथराया सा खड़ा है
खाली घड़ा है |
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