Sunday, 7 July 2013

अब जब मिलेगी भाषा

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भाषा मुझे मिली
एक बुर्राक सफ़ेद साड़ी में
एक नजर में मुझे
वह विधवा सी लगी
विधवा को जब कोई देखता है
गलत नज़र से देखता है
उन्होंने वादा किया
गलत नज़र से बचाने का
जिंदगी भर साथ निभाने का
अपनी खोली छोड़कर
वह उसके घर रहने आई
उसने सौंप दिए सारे मोती
कर दी झोली खाली
तबसे वे सफेदपोश
खा रहे हैं उसकी दलाली
उस विधवा की सफ़ेद बुर्राक साड़ी
कर दी मैली काली काली |
अब जब भी भाषा
मुझे मिलेगी तो उसे समझाउँगा
छोड़ दो शालीनता अब
और दो उन्हें भद्दी भद्दी गाली |

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