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तुम सोचती होगी
तुम्हारे स्पर्श की
कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं होती |
तुम्हारा स्पर्श
मुझे गेरुए वस्त्र पहना जाता है
गेरुए वस्त्रों की
मेरे मन पर
जो संस्कारगत प्रतिक्रिया होती है
मैं उसे नकार नहीं पाता हूँ
कुछ क्षणों के लिए
सच,मैं सन्यासी हो जाता हूँ |
११/१२/१९७८
तुम सोचती होगी
तुम्हारे स्पर्श की
कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं होती |
तुम्हारा स्पर्श
मुझे गेरुए वस्त्र पहना जाता है
गेरुए वस्त्रों की
मेरे मन पर
जो संस्कारगत प्रतिक्रिया होती है
मैं उसे नकार नहीं पाता हूँ
कुछ क्षणों के लिए
सच,मैं सन्यासी हो जाता हूँ |
११/१२/१९७८
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