Wednesday, 17 July 2013

स्त्री है मुकम्मल कविता

हर माँ का
जवान चेहरा
उसकी पुत्री से मिलता है
और हर पुत्री
मुकम्मल कविता है |
यह बात
न माँ जानती है
और न उसकी पुत्री
उसे कविता लिखने के काम में
लगा दिया जाता है
और कविता जब खुद
कविता लिखती है
कितनी बेढंगी लगती है |

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