हर माँ का
जवान चेहरा
उसकी पुत्री से मिलता है
और हर पुत्री
मुकम्मल कविता है |
यह बात
न माँ जानती है
और न उसकी पुत्री
उसे कविता लिखने के काम में
लगा दिया जाता है
और कविता जब खुद
कविता लिखती है
कितनी बेढंगी लगती है |
जवान चेहरा
उसकी पुत्री से मिलता है
और हर पुत्री
मुकम्मल कविता है |
यह बात
न माँ जानती है
और न उसकी पुत्री
उसे कविता लिखने के काम में
लगा दिया जाता है
और कविता जब खुद
कविता लिखती है
कितनी बेढंगी लगती है |
No comments:
Post a Comment