Thursday, 9 May 2013

कविता क्यों ?
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जब
खुद लिखना है
खुद ही पढ़ना है
वाजिब सवाल है
कविता क्यों लिखी जाए ?
कविता
पागलों की तरह
गलियों और चौबारों में
कवि को खोज रही है |
कवि
सत्ता के गलियारों में
न जाने किस आस में है खड़ा ?
कवि व्यस्त है
उसे आज और अभी
किसी न किसी
पुरस्कार या सम्मान की
व्यवस्था है करनी
कविता लिखने के लिए तो
पूरा जीवन है पड़ा |
कविता की आँख में आँसू है
और कवि
अपनी बात पर है अड़ा  |

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