आदमी और औरत
विपरीत ध्रुव, दोनों के शरीर एक दुसरे को खीचते हैं | कभी औरत आदमी की पत्नी कहाती है तो कभी प्रेमिका | शरीर का आकर्षण धीरे धीरे ख़त्म हो जाता है प्रेमिका मरने लगती है | हमारे बच्चों की जो माँ कहलाती है वह है पत्नी | शरीर का आकर्षण तो यहाँ भी ख़त्म लेकिन अब हमारे आकर्षण का केंद्र होते हैं हमारे बच्चे , इस वैकल्पिक आकर्षण की वजह से टिका रहता है पति पत्नी का सम्बन्ध तमाम सडन के बावजूद भी | ताज्जुब होता है सबंधों के सडांध की बू पति या पत्नी के नाक तक क्यों नहीं जाती ?
विपरीत ध्रुव, दोनों के शरीर एक दुसरे को खीचते हैं | कभी औरत आदमी की पत्नी कहाती है तो कभी प्रेमिका | शरीर का आकर्षण धीरे धीरे ख़त्म हो जाता है प्रेमिका मरने लगती है | हमारे बच्चों की जो माँ कहलाती है वह है पत्नी | शरीर का आकर्षण तो यहाँ भी ख़त्म लेकिन अब हमारे आकर्षण का केंद्र होते हैं हमारे बच्चे , इस वैकल्पिक आकर्षण की वजह से टिका रहता है पति पत्नी का सम्बन्ध तमाम सडन के बावजूद भी | ताज्जुब होता है सबंधों के सडांध की बू पति या पत्नी के नाक तक क्यों नहीं जाती ?
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