एकांत में
==========
एकाकीपन
मेरे भीतर तक
कुछ इस तरह
पैठ गया है कि
मै अकेले में भी
अकेला नहीं होता |
पैरों के
भारीपन से लगता है
जैसे पैरों पर कोई
पत्थर बैठ गया है |
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एकाकीपन
मेरे भीतर तक
कुछ इस तरह
पैठ गया है कि
मै अकेले में भी
अकेला नहीं होता |
पैरों के
भारीपन से लगता है
जैसे पैरों पर कोई
पत्थर बैठ गया है |
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