सैलानी का
कोई घर नहीं होता
रास्तों पर रहता है
रास्ते पर सोता है
और रास्ते के कन्धों पर
सिर रखकर रोता है
सैलानी का
कोई घर नहीं होता
कोई घर नहीं होता
रास्तों पर रहता है
रास्ते पर सोता है
और रास्ते के कन्धों पर
सिर रखकर रोता है
सैलानी का
कोई घर नहीं होता
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