औरत की यह नाराजगी कविता ,कहानी या डायरी से बाहर क्यों नहीं दिखाई पड़ती है ? मुझे तो लगता है कि औरत जोखिम उठाने को तैयार ही नहीं है | औरत के खिलाफ हो रहे सारे षड्यंत्रों का ठीकरा पुरुष प्रधान व्यवस्था पर फोड़ने से कुछ बदलने वाला नहीं है |
अगर करना है
मदमस्त हाथी की सवारी
करना होगा
जोखिम उठाने की तैयारी
अगर करना है
मदमस्त हाथी की सवारी
करना होगा
जोखिम उठाने की तैयारी
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