गलतियां बाबर ने की थी जुम्मन का घर फिर क्यों जले --अदम गोंडवी |
अदम गोंडवी जी की उपरोक्त पंक्तियों को पढ़कर ऐसा लगता है कि बहुसंख्यकों द्वारा अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किया जा रहा है | इसको निम्न तरीके से लिखा जाता तो इससे साम्प्रदायिकता की बू खत्म हो जाती |
बाबर की गलतियों का खामियाजा हम क्यों भरे
कभी रामू का तो कभी जुम्मन का घर क्यों जले
अदम गोंडवी जी की उपरोक्त पंक्तियों को पढ़कर ऐसा लगता है कि बहुसंख्यकों द्वारा अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किया जा रहा है | इसको निम्न तरीके से लिखा जाता तो इससे साम्प्रदायिकता की बू खत्म हो जाती |
बाबर की गलतियों का खामियाजा हम क्यों भरे
कभी रामू का तो कभी जुम्मन का घर क्यों जले
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