Friday, 16 October 2015

सत्ता पुरष्कार उन्हीं लोगों को देती हैं जो सत्ता को suit करता है, सत्ता की विचारधारा का पक्षधर होता है, जिस समय यह पुरष्कार ग्रहण किया गया था क्या सत्ता का चेहरा इन कवियों/ लेखकों के मनमाफिक था ? सत्ता का चेहरा कभी नहीं बदलता,क्या ये बात पुरष्कार लेने वाले नहीं जानते थे ? 
नाटक जारी है |

एक-एक कर वापस कर रहे हैं ताकि चर्चा बनी रहे , नोबल पुरस्कार किसको मिला यह तो लोगों को याद नहीं रहता है ,अब किसे याद होगा कि अकादमी पुरस्कार किसको मिला और किसको नहीं | चलों हम भी उस पुरस्कार को वापस करने की घोषणा कर दें जो हमें मिला ही नहीं |

बहुमत से चुनी गयी सरकार के प्रधानमंत्री को रोज सैकड़ों अपशब्द कहे जाते हैं ,अपशब्द कहने वाले घर जाकर आराम से सो जाते हैं, अरे भाई अब और किस तरह की अभिव्यक्ति की आज़ादी चाहिए देश के अकादमी पुरस्कार विजेता महान साहित्यकारों को |
देश के 
किसी भी हिस्से में 
कोई पेड़ गिरा 
हवाएँ तेज चली 
भूकम्प आया
इन सबकी जिम्मेदारी
आप उन पर ठोक देते हैं
आखिर कैसी अभिव्यक्ति की आज़ादी चाहते हैं आप ?



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