Sunday, 11 October 2015

बहुत दिनों से रात में सोया नहीं हूँ मैं
कमबख्त किसी ने प्याला चुरा लिया

वह जब मरेगा भूख से ही मरेगा
कमबख्त किसी ने निवाला चुरा लिया

खुश थे चाँद और सूरज की रोशनी में हम
कम्बख्तों ने चाँद और सूरज चुरा लिया  

अलीबाबा पर भारी पड़ गये चालीस चोर
कम्बख्तों ने खुल जा सिमसिम का मंतर चुरा लिया

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