पलक झपकते ही
पीड़ित
उत्पीड़क बन जाता है
शोषित
शोषक बन जाता है
समतावादी समाज का निर्माण
एक सपना है
वर्ग संघर्ष तो
अनंतकाल तक चलना है |
पीड़ित
उत्पीड़क बन जाता है
शोषित
शोषक बन जाता है
समतावादी समाज का निर्माण
एक सपना है
वर्ग संघर्ष तो
अनंतकाल तक चलना है |
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