हम विरोध करते हैं
चीखते और चिल्लाते हैं
भारी भरकम नारे लगाते हैं
उनपर बड़े संगीन आरोप लगाते हैं
और फिर खामोश हो जाते हैं
काश
अपने विरोध में
हम खुद खड़े हो पाते
तो हमें
सारे सवालों के जवाब मिल जाते
चीखते और चिल्लाते हैं
भारी भरकम नारे लगाते हैं
उनपर बड़े संगीन आरोप लगाते हैं
और फिर खामोश हो जाते हैं
काश
अपने विरोध में
हम खुद खड़े हो पाते
तो हमें
सारे सवालों के जवाब मिल जाते
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