शोषण उत्पीडन के खिलाफ संघर्ष ,वर्ग संघर्ष किसी न किसी रूप में मार्क्सवाद से बहुत पहले भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराता रहा है | निश्चित ही हम कह सकते है कि एक समतावादी समाज की स्थापना के लिए मनुष्य का संघर्ष अनवरत मौजूद रहा है लेकिन आज भी शोषण ,उत्पीडन ज्यों का त्यों | इससे एक प्रमेय तो सिद्द हो ही जाती है कि समतावादी समाज की स्थापना एक ख्वाब है और इस ख्वाब को देखने की स्वतन्त्रता हम से कोई नहीं छीन सकता |
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