पिता जी खुलेआम
सबके सामने
सिगरेट पीते थे
घर के आँगन में
शेर की तरह टहलते थे
मैंने पिया सिगरेट
खुलेआम सबके सामने
गुनाह किया
मुझे बागी करार दिया
पिता का झापड़
माँ का रोना
और बहन का उलाहना
सब याद है मुझे
माँ ने रोते हुए कहा था
अरे सिगरेट पीना है
अगर तुम्हारी मजबूरी
तो सबके सामने पियो
क्या यह है जरूरी |
बहन ने कहा था
कुछ तो
बड़ों की इज्ज़त किया करो
कैसे जीना है यह हम से सीखो
देखो मैं भी तो प्यार करती हूँ
बड़ों को पता न चल जाए
इस बात से डरती हूँ
इसलिए प्रेम भी छिपा के करती हूँ |
मैं आज तक
नहीं समझ पाया कि
मैंने किस तरह
उनकी इज्ज़त में बट्टा लगाया था ?
अरे भाई
मैं तो वही कर रहा था
जो मेरा बाप कर रहा था |
बहरहाल जब मैं पिता बना
तब कहीं जाकर मुझे
सबके सामने खुलेआम
सिगरेट पीने का हक मिला |
सबके सामने
सिगरेट पीते थे
घर के आँगन में
शेर की तरह टहलते थे
मैंने पिया सिगरेट
खुलेआम सबके सामने
गुनाह किया
मुझे बागी करार दिया
पिता का झापड़
माँ का रोना
और बहन का उलाहना
सब याद है मुझे
माँ ने रोते हुए कहा था
अरे सिगरेट पीना है
अगर तुम्हारी मजबूरी
तो सबके सामने पियो
क्या यह है जरूरी |
बहन ने कहा था
कुछ तो
बड़ों की इज्ज़त किया करो
कैसे जीना है यह हम से सीखो
देखो मैं भी तो प्यार करती हूँ
बड़ों को पता न चल जाए
इस बात से डरती हूँ
इसलिए प्रेम भी छिपा के करती हूँ |
मैं आज तक
नहीं समझ पाया कि
मैंने किस तरह
उनकी इज्ज़त में बट्टा लगाया था ?
अरे भाई
मैं तो वही कर रहा था
जो मेरा बाप कर रहा था |
बहरहाल जब मैं पिता बना
तब कहीं जाकर मुझे
सबके सामने खुलेआम
सिगरेट पीने का हक मिला |
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