वो मुसलमान परस्त थे
ये हिन्दू परस्त होने का पीटते हैं ढिंढोरा
ये और वो दोनों एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं
वो मुसलमान से शुरू करते थे
और थोड़ी देर बाद हिन्दू पर आते थे
ये हिन्दू से शुरू करते हैं और मुसलमान तक आते हैं
हिन्दू और मुसलमान बार-बार दोहराते हैं
स्त्री की शुचिता इन्हें भी बहुत प्यारी है
ये एक न एक दिन
महिलाओं को पहना देंगे बुर्का
न हिन्दू को न मुसलमान को
ये चाहते हैं केवल पुरुष को खुश करना |
ये हिन्दू परस्त होने का पीटते हैं ढिंढोरा
ये और वो दोनों एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं
वो मुसलमान से शुरू करते थे
और थोड़ी देर बाद हिन्दू पर आते थे
ये हिन्दू से शुरू करते हैं और मुसलमान तक आते हैं
हिन्दू और मुसलमान बार-बार दोहराते हैं
स्त्री की शुचिता इन्हें भी बहुत प्यारी है
ये एक न एक दिन
महिलाओं को पहना देंगे बुर्का
न हिन्दू को न मुसलमान को
ये चाहते हैं केवल पुरुष को खुश करना |
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