वे त्रस्त हैं
फिर भी शव की आराधना में व्यस्त हैं |
पत्थर को घिस-घिसकर
एक बुत बनाते हैं
फिर सारा जीवन
उसकी पूजा अर्चना में गवांते हैं
वे यों ही मस्त हैं
किसने कहा वे त्रस्त हैं ?
फिर भी शव की आराधना में व्यस्त हैं |
पत्थर को घिस-घिसकर
एक बुत बनाते हैं
फिर सारा जीवन
उसकी पूजा अर्चना में गवांते हैं
वे यों ही मस्त हैं
किसने कहा वे त्रस्त हैं ?
No comments:
Post a Comment