अतृप्त मन
अगर तृप्त हो जाता
तो न ख्वाब आते
और न ख्वाब में आते तुम
जिस्म पर चीटियों का रेंगना
स्थगित हो जाता
और हम बेलौस मुस्कराते |
अगर तृप्त हो जाता
तो न ख्वाब आते
और न ख्वाब में आते तुम
जिस्म पर चीटियों का रेंगना
स्थगित हो जाता
और हम बेलौस मुस्कराते |
No comments:
Post a Comment