बरसों-बरस पहले
बजा था आज़ादी का बिगुल
तंत्र के शिकंजे से
गण को मुक्ति नहीं मिली
बगुले फूँक रहे हैं
गण के कानों में मंत्र
आओ मनाएं गणतंत्र दिवस |
तंत्र के शिकंजे से
गण की मुक्ति के लिए
हमारी ढेरों शुभ-कामनाएँ |
बजा था आज़ादी का बिगुल
तंत्र के शिकंजे से
गण को मुक्ति नहीं मिली
बगुले फूँक रहे हैं
गण के कानों में मंत्र
आओ मनाएं गणतंत्र दिवस |
तंत्र के शिकंजे से
गण की मुक्ति के लिए
हमारी ढेरों शुभ-कामनाएँ |
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