Friday, 17 January 2014

सोचा था
नहीं निकलूंगा घर से
आसमान फटनें का डर है
सड़क हादसों का घर है  |
खुद को समझाया
घर से बाहर निकल आया
कभी इस सड़क पर
कभी उस सड़क पर दौड़ता रहा
कुछ नहीं पाया तो "घर" लौट आया |
घर में,
मेरे शयन कक्ष की छत गिर पड़ी थी
और वहाँ
एक अधमरी लाश दबी पड़ी थी | 

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